बारिशें होने लगी आज फिर ,
फिर समां सा बंधने लगा,
सब ख्यालों को विराम दीजिये,
पकोड़ो पर ध्यान दीजिए,
चाय की चुस्कियों के साथ
थोड़ा गपशप भी दर्ज कीजिये
यादों के बटवे को खोल कर,
खुशियों की रेजगारी खर्च कीजिये
हर बून्द जब मिट्टी से टकराये
मिट्टी कुछ यूं शरमाये
चिपक सी बस आपस मे जाए
फिर मीठी सी खुशबू बन जाये
बारिश भी क्या कमाल करे
मस्ती से सबको मालामाल करे,
जीवन के दो चार यही पल
क्यों न खुद पर ही इस्तेमाल करें।

Beautiful ❤️ Loved this…
Apurva | http://www.buildyourpersona.com
LikeLike
Thank you,😊
LikeLike
अति सुन्दर रचना। भावपूर्ण अभिव्यक्ति 👌👌💐💐
LikeLiked by 1 person
Bahut bahut aabhar sir👌🏻🌷🌷
LikeLiked by 1 person
Jis tarah se aapne shabdon ka prayog karke kavita ki rachna ki woh Adbhud aur atisundar hai.
LikeLiked by 2 people
I m thankful to you for liking it ,thank you so much😊
LikeLiked by 1 person
Very nice
LikeLiked by 1 person
Thank you sir😊
LikeLike