कौन हूँ मैं

आज न जाने क्यों मुझे, खुद के ही वजूत की तलाश है,

कुछ सवाल पूछने हैं मुझे , क्या समय आपके पास है,

कभी अजन्मी हूँ मैं, चूम ही न सकी जीवन को ,

आती तो वजूत पा ही जाती, ऐसा पूर्ण विश्वास है,

जीवन के चक्रव्यूह में, जो आयी भी ,तो न समझ सकी,

क्यों छीना बचपन जीवन से भरा ,सांसे भी दी गिनती की,

हुई बड़ी तो इस दुनिया की, तरह -तरह की नज़रों ने घेरा,

जीने की चाह अजब है, मुझमे भी है ,मन तो मन है मेरा,

जाऊं कहाँ मैं , उलझ गई हूँ, कि मिले सूकून कहीं ना,

अब नही डरूँगी ,मै लड़ूंगी, जीवन है मुझको जीना,

योद्धा हूँ मैं ,डटी रहूंगी, जीवन पर तो अधिकार है मेरा,

रात काली बहुत काट ली, अब जीवन में होगा सवेरा,

नारी हूँ मै, शरीर ही नही, आत्मा का भी मुझ मे वास है,

स्थान दो मेरे वजूत को, मुझमे में भी जीवन की प्यास है।

आज न  जाने क्यों मुझे, खुद के वजूत की तलाश है,

आज न  जाने क्यों ………………

Always seeking your blessings and best wishes🌷🌷🌷🌹🌹🌹

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