कभी

खुद से तो टकराओ कभी

क्यूँ टकराते हो चट्टानों से

खुद से तो पूछो सवाल कभी

क्यूँ पूछते हो अंजानो से

खुद को तो मिलों कभी

क्यूं मिलते हो तकलीफों से

खुद को तो तराशों कभी

क्यूँ तराशते हो चट्टानों को

खुद से तो उलझो कभी

यूँ उलझते हो सवालो से

खुद से तो टकराओ कभी

क्यूँ टकराते हो चट्टानों से

Image. Pinterest .com

21 thoughts on “कभी

  1. अति सुन्दर👌👌💐💐 सारे सवालों का जवाब अपने पास ही होता है, पर मृग की तरह कस्तूरी की तलाश में मूढ़ मानव भी भटकता रहता है।

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    1. Sir आपके शब्दों की बहती धारा हमेशा सबको हृदय को ज्ञान प्रदान करती हुई निकलती है ,
      आभार💕🌷🌷😊

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