महफ़िल

वक़्त से ज़रा सी इज़ाज़त मांग लू

साँसों की थोड़ी ओर गिनती बढ़ा दे

उम्र तो कई मौसम देख चुकी

पर दिल पगला बूढ़ा होता ही नही

18 thoughts on “महफ़िल

  1. अति सुंदर पंक्तियां 👌👌💐
    पर मत बनाओ दिल को बूढ़ा या पगला
    क्या रह जायेगा फिर जिंदगी में अगला?

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  2. वक़्त से साँसें उधार माँग लेने का हुनर है इसमें,
    उम्र की थकान के आगे दिल की बग़ावत नज़र है इसमें।

    बहुत ख़ूबसूरती से कहा है आपने,,,
    जिस्म भले मौसमों से गुज़र गया हो,
    दिल आज भी ज़िन्दगी से इश्क़ करता है।
    -विजय

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