गुज़ारिश

फूलों से गुज़ारिश है कि न इतना मुस्कुराया करें


झरती उन पंखुड़ियों का दर्द यूँ छुपाया न करें ।

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6 thoughts on “गुज़ारिश

  1. पंखुड़ियाँ जब झरती हैं,
    तो केवल धरती पर नहीं गिरतीं
    वे समय के आँचल में
    अपनी सुगंध छोड़ जाती हैं।
    दर्द यदि छुपा भी लिया जाए,
    तो उसकी ख़ुशबू
    हवा को बता देती है
    कि यह मुस्कान
    पूरी तरह निस्संग नहीं।
    शायद फूल इसलिए हँसते हैं,
    ताकि गिरते वक़्त
    उनका दुःख
    किसी की आँखों में न उतर जाए।
    और यही उनकी सबसे बड़ी करुणा है
    खिलकर भी
    अपने टूटने का शोर
    न करना।
    -विजय श्रीवास्तव

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