पंखुड़ियाँ जब झरती हैं,
तो केवल धरती पर नहीं गिरतीं
वे समय के आँचल में
अपनी सुगंध छोड़ जाती हैं।
दर्द यदि छुपा भी लिया जाए,
तो उसकी ख़ुशबू
हवा को बता देती है
कि यह मुस्कान
पूरी तरह निस्संग नहीं।
शायद फूल इसलिए हँसते हैं,
ताकि गिरते वक़्त
उनका दुःख
किसी की आँखों में न उतर जाए।
और यही उनकी सबसे बड़ी करुणा है
खिलकर भी
अपने टूटने का शोर
न करना।
-विजय श्रीवास्तव
💯
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🌸🌸
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Wah bahut khoob!
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Aabhar bahut bahut aapka sir 🌸🌸🌸
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पंखुड़ियाँ जब झरती हैं,
तो केवल धरती पर नहीं गिरतीं
वे समय के आँचल में
अपनी सुगंध छोड़ जाती हैं।
दर्द यदि छुपा भी लिया जाए,
तो उसकी ख़ुशबू
हवा को बता देती है
कि यह मुस्कान
पूरी तरह निस्संग नहीं।
शायद फूल इसलिए हँसते हैं,
ताकि गिरते वक़्त
उनका दुःख
किसी की आँखों में न उतर जाए।
और यही उनकी सबसे बड़ी करुणा है
खिलकर भी
अपने टूटने का शोर
न करना।
-विजय श्रीवास्तव
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बेहद खूबसूरत कविता
बहुत बहुत धन्यवाद आपका ✍️✍️😊
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