पसंद

नही आता पसंद उन्हें हम जो लिखते हैं,
क्या करे शब्दजाल में कहाँ सब उलझते हैं,
या यूँ कहें कि शब्द सबसे कहाँ संभलते हैं,
शब्दों की दुनिया मे तो कई जज्बात पलते हैं,


शब्द सुकून,शब्द ज्ञान- स्रोत,

शब्दों से ही मन का मेल है,

शब्द मरहम, शब्द प्रेरणा,

शब्दों का ही सारा खेल है,

शब्दजाल की मायानगरी का,

शब्द जादूगर निराला है,

डूब के देखो इस की गहराइयों में,

आत्मिक शांति देने वाला है,


मुझे पसंद है ,मेरी ये दुनिया,

जहाँ शब्दों की अनजानी डोर बांधती है ,

जहाँ ज्ञान – गंगा की बहती धारा में,

रचनाओँ और प्रतिभाओं की नाव तैरती है।

Always seeking your blessings and wishes💕💕💕

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13 thoughts on “पसंद

  1. वाह, बहुत सुन्दर लिखा है | मैं तो कहता हूँ …

    नचाता कुदता पूरे विश्व में
    गलतफहमी फैलाता है
    यह शब्दों का मायाजाल है
    पूरा जमाना शिकार हो जाता है |

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    1. आभार🌺🌺
      आपकी दोनों भाषाओं पर पकड़ भी अपरंपार है,
      सारी पोस्ट पढ़ती हूँ, आपसे सीखने का विचार है

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      1. आपके कृपा शब्दों के लिए धन्यवाद। दरअसल हम सभी एक दूसरे से सीख रहे हैं। सीखने की उम्र कभी खत्म नहीं होती।

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