रंग

कुछ रंग मिले थे वक्त के ,
कुछ जिंदगी ने ईनाम दिए ,
कुछ घुल गए ज़माने से ,
कुछ हमने ख़ुद पे तमाम किए ,,

2 thoughts on “रंग

  1. बहुत सुंदर भावबोध है।
    इन पंक्तियों में समय, अनुभव और आत्मचयन; तीनों का संतुलित स्वीकार झलकता है।
    जो रंग ज़माने में घुल गए, वे समझ बने;
    और जो आपने स्वयं पर सँजोए, वे पहचान बन गए।
    यही जीवन की सबसे सधी हुई कविता
    विजय श्रीवास्तव

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