रंग Reenabist blogging 24th Jan 2026 1 Minute कुछ रंग मिले थे वक्त के ,कुछ जिंदगी ने ईनाम दिए ,कुछ घुल गए ज़माने से ,कुछ हमने ख़ुद पे तमाम किए ,, Share Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Like Loading... Related Published by Reenabist love nature and has a passion for writing View all posts by Reenabist Published 24th Jan 2026
बहुत सुंदर भावबोध है। इन पंक्तियों में समय, अनुभव और आत्मचयन; तीनों का संतुलित स्वीकार झलकता है। जो रंग ज़माने में घुल गए, वे समझ बने; और जो आपने स्वयं पर सँजोए, वे पहचान बन गए। यही जीवन की सबसे सधी हुई कविता विजय श्रीवास्तव LikeLiked by 1 person Reply
बहुत सुंदर भावबोध है।
इन पंक्तियों में समय, अनुभव और आत्मचयन; तीनों का संतुलित स्वीकार झलकता है।
जो रंग ज़माने में घुल गए, वे समझ बने;
और जो आपने स्वयं पर सँजोए, वे पहचान बन गए।
यही जीवन की सबसे सधी हुई कविता
विजय श्रीवास्तव
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बहुत बढ़िया 🎊
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