मौन

बहुत पहना चुकी मौन को अपने ,
कई खूबसूरत शब्दों के परिधान ,
अब इन बैरी शब्दों की ,
मौन की अग्नि में आहुति दूँगी मैं ,
स्मरण विस्मरण की सीमाएं ,
और मेरे मन की जटिलताएं ,
व्यक्त कर, मुझे रहस्मस्यी
आवरण से स्पष्टता की ओर,
धकेलते है ये ,
मेरा अस्तित्व सुलझ कर उलझा ,
या उलझ कर सुलझा ,
विवरण देते हैं ये ,
मेरे बैरी हैं ये !!!!!!

2 thoughts on “मौन

  1. आपके बैरी शब्द, मौन की अग्नि में जैसे चमकते हीरे,
    अस्तित्व की उलझनों में भी फूटती आपकी सच्चाई की किरणें।
    हर जटिल भाव, हर स्मरण और विस्मरण,
    हमें दिखाते हैं आपकी गहराई और अदम्य शक्ति।

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