आचारों और विचारों के मध्य, झूलती ये आम - सी जिंदगी,थोड़ी सी शरारत लिए मुस्कुराती,बेफिक्र थोड़ी ,लिए थोड़ी संजीदगी,जीवन के फलसफे थोड़े ,सीखती सिखाती सी जिंदगी,व्यवहार में। लिए धैर्य की जमीन ,सच की कर्मों में बंदिगी,करुणा भरी हो हृदय मेंमुख पे बचपन सी ताज़गी,इंसानियत को जीवित करतीजीवन से भरी हो जिंदगी। Reenahttps://reenabistartart.wordpress.com
Tag: जीवन
कौन हूँ मैं
आज न जाने क्यों मुझे, खुद के ही वजूत की तलाश है, कुछ सवाल पूछने हैं मुझे , क्या समय आपके पास है, कभी अजन्मी हूँ मैं, चूम ही न सकी जीवन को , आती तो वजूत पा ही जाती, ऐसा पूर्ण विश्वास है, जीवन के चक्रव्यूह में, जो आयी भी ,तो न समझ सकी, … Continue reading कौन हूँ मैं

