प्रकृति के दो अद्भुत छोर, एक नीचे दूजा ऊपर की ओर, सदियों से एक दूजे को निहारते हुए, जुदा होके भी साथ, मानो हो कोई अदृश्य डोर। दोनो अमर प्रेम दर्शाते हुए एक बारिश बरसाते हुए तो दूजा बूंदे दिल मे समेटे प्रेम रूपी हरियाली लहराते हुए रोज़ तारों की बारात लिए, आकाश जब धरती … Continue reading धरती आकाश
