आचारों और विचारों के मध्य, झूलती ये आम - सी जिंदगी,थोड़ी सी शरारत लिए मुस्कुराती,बेफिक्र थोड़ी ,लिए थोड़ी संजीदगी,जीवन के फलसफे थोड़े ,सीखती सिखाती सी जिंदगी,व्यवहार में। लिए धैर्य की जमीन ,सच की कर्मों में बंदिगी,करुणा भरी हो हृदय मेंमुख पे बचपन सी ताज़गी,इंसानियत को जीवित करतीजीवन से भरी हो जिंदगी। Reenahttps://reenabistartart.wordpress.com
