खामोशियाँ

खामोशियाँ

मेरी खामोशियों ने ,खुद से बोलना सिखा दिया,

अब जो लगी हूँ बोलने, तो दायरे भूल गयी ,

कभी ख़्याबो को पंख दे दिए तो, कभी,

उन्हें शब्दों में पिरो ,कविता बना दिया ,

शब्दो की भी ज़ुबाँ होती है, ये मुझको बता दिया,

मैंने भी अपने दर्द को अब, खुल कर जता दिया ,

तन्हाइयों ने मेरी ज़िन्दगी को संगीत जो दिया,

तो मैने भी उन सुरो से, एक गीत बना दिया ,

मेरी खामोशियों ने ,खुद से बोलना सिखा दिया ।

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