
प्रकृति के दो अद्भुत छोर,
एक नीचे दूजा ऊपर की ओर,
सदियों से एक दूजे को निहारते हुए,
जुदा होके भी साथ, मानो हो कोई अदृश्य डोर।
दोनो अमर प्रेम दर्शाते हुए
एक बारिश बरसाते हुए
तो दूजा बूंदे दिल मे समेटे
प्रेम रूपी हरियाली लहराते हुए
रोज़ तारों की बारात लिए,
आकाश जब धरती को पुकारे,
धरती भी चांदनी ओढ़नी ओढ़े ,
दुल्हन की तरह रूप अपना सवांरे।
रीना ®️〰️〰️〰️1
Always seeking your blessings and wishes💕💕💕
Wow!Beautifully written.Thanks for sharing.Take care.🙏😊🌹
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Thank you sir 🌺🌺
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My pleasure.🌹😊🙏
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Wow! Such a beautiful poem🌼
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Thanks dear🌺🌺
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अद्भुत पंक्तियां! बहुत बहुत बधाई!!
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आभार🌺🌺😊😊
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वाह YQdidi के साथ Reena didi का collab😅
बहुत ही प्यारी पंक्तियाँ है💕💕
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हाहा सही बात 🌺🌺🌺🤗
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लाज़वाब कविता ,रीना !प्रकृति की माया का अद्भुद वर्णन !ऐसे ही सुंदर प्रयास जारी रखें !😊
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आभार ।
प्रेरणादायक शब्दों के लिए बहुत बहुत आभार🌺🌺
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🙏
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