दर्द जब सहता है तो यूं कहता है

आसान नहीं समझना कि, कितनी चाहत रखेँ,

चाह साथ जीने की करें,या मर मिटने की  चाहत रखे

अब तो आंसू भी मुस्कुराने लगे है,

मानो कोई ग़ज़ल सी गाने लगे है,

दर्द जो सताया करते थे कभी ,

वो भी अब, गीत गुनगुनाने लगे है,

दिल मे थे जो बसे, टूटे से अरमां,

न जाने कैसा अनसुना संगीत बजाने लगे है,

तन्हाइयों ने जो घरौंदा एक बसाया था ,

वो भी अब महल उसे बनाने लगे है,

दर्द ने हद की दीवार क्या रौंदी,

दिल क्या, अब तो रूह में भी समाने लगे है ,

गैरों से क्या करे शिकायत दूर जाने की,

अब तो अपने ही फासला बनाने लगे है,

किस्मत ने ग़मों का गुलदस्ता जो दिया सजा के,

बना उन फूलों से माला ,अब गले से लगाने लगे है

छिपा के जो रखा था हमेशा ही, जो हमने,

आज न जाने क्यू ,उस को जताने लगे है

अब तो आंसू भी मुस्कुराने लगे है ……….

Always seeking your blessings and wishes.💕💕💕

Image: pexel

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17 thoughts on “दर्द जब सहता है तो यूं कहता है

  1. वाह। बहुत खूब। इस गजल के अंत में जो पंक्तियां जोड़ी हैं, जो कल आपने शेयर की थी, इसके सौंदर्य को निखार दिया है। अप्रतिम रचना👌👌👍

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