महफ़िल

वक़्त से ज़रा सी इज़ाज़त मांग लू

साँसों की थोड़ी ओर गिनती बढ़ा दे

उम्र तो कई मौसम देख चुकी

पर दिल पगला बूढ़ा होता ही नही

17 thoughts on “महफ़िल

  1. अति सुंदर पंक्तियां 👌👌💐
    पर मत बनाओ दिल को बूढ़ा या पगला
    क्या रह जायेगा फिर जिंदगी में अगला?

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