एक गीत

क्यों चेहरे से तुम्हारे हमारी नज़रों का नाता है

दिल तो अंश है मेरा , पर क्यों तुममे समाता है

क्यों ख्वाब हमारा है ,पर रंग आपके सजाता है

क्यों हार कर तुमसे जीत सा आनंद आता है

कुछ तो है ज़रूर..,🎶🎶🎶🎶🎶🎶🎶


इतनी खूबसूरत कब हुई ज़िन्दगी, सोचती हूँ

इतने रंगों से कब सजी ज़िन्दगी, सोचती हूँ

क्यों पतझड़ भी अब हमें सावन से भाता है

क्यों हार कर तुमसे जीत सा आनंद आता है

कुछ तो है ज़रूर..,🎶🎶🎶🎶🎶🎶🎶


क्यों हवाए सुर मिलाने लगी सुर से मेरे,

क्यों दिल तितलियों की भांति उड़ने लगा

क्यों आसमान मीठी खुशी बरसाता है

क्यों हार कर तुमसे जीत सा आनंद आता है

कुछ तो है ज़रूर..,🎶🎶🎶🎶🎶🎶🎶

15 thoughts on “एक गीत

  1. So much beauty in this…I wish I could experience it in your native language as it’s written, but even using a translator it is stunning in its beauty. You write so effortlessly, Reena. 🙂

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  2. कुछ तो है जरूर
    इस कविता में आपके
    कि गैर भाषी भी
    वाह वाह लगे हैं करने…
    👌👌💐💖
    वास्तव में अत्यंत सुंदर भावाभिव्यक्ति है इन पंक्तियों में 👍😊

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    1. आपकी इस प्यारी कविता ने तो हृदय प्रफुल्लित कर दिया 🌹🌹😊 बहुत बहुत आभार

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  3. बहुत सुंदर रचना।
    प्रेम के आत्मविस्मृत भाव को आपने बड़ी सहजता और मधुर लय में पिरोया है।
    “हार कर तुमसे जीत सा आनंद आता है” यह पंक्ति प्रेम की उस अवस्था को छूती है जहाँ समर्पण ही सबसे बड़ी विजय बन जाता है।
    पूरी कविता भाव, संगीत और अनुभूति का सुंदर संगम है।
    -विजय

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