तूफान कम थे दिल की कश्ती के लिए
जो आप भी आ गए
इश्क़ की पाल ऐसी बांधी
कि कश्ती ही डूबा गए,
डूबते डूबते हम भी तैरना सीख गए
दुआ थी किसी की जो किनारे पा गए
तूफान अब डराएं, ये मुमकिन नही
दर्द धड़कनो से अब दिल मे समा गए

Image by pexel
तूफान कम थे दिल की कश्ती के लिए
जो आप भी आ गए
इश्क़ की पाल ऐसी बांधी
कि कश्ती ही डूबा गए,
डूबते डूबते हम भी तैरना सीख गए
दुआ थी किसी की जो किनारे पा गए
तूफान अब डराएं, ये मुमकिन नही
दर्द धड़कनो से अब दिल मे समा गए

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The paradox you write of is profound. Drowning while swimming, is like life. A beautiful meditation, Reena. 💞
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Thank you so much ❤️💕Jeff
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You’re welcome, Reena. ❤️💞 Always.
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वाह, बहुत सुंदर।
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धन्यवाद sir💕💕
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वाह वाह बहुत खूब। गजब की अभिव्यक्ति है। Well penned 👌💖
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धन्यवाद sir,💕💕
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तेरी कविता दिल को छू गयी, रीना! बहुत सुन्दर. ❤️
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आपकी बात दिल को छू गयी, बहुत बहुत धन्यवाद
💕💕❤️🙂
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❤️❤️
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जीवन का स्पंदन
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धन्यवाद😊💕
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बहुत अच्छी रचना, रीना जी
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धन्यवाद VM😊🌹
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🙏🌹
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