किश्तों में ही सहीं, ख़ुशी के पल तों मिलें
गमों के तो दौर जियें है हमने
चाहत न कोई की ,न कभी हक़ ही जताया
खुद से ख़ुद ही को ग़ैर किया है हमने
झूठा ही सही ,कोई ढाँढस तो दे
दर्द के तो आसमान छुए ही हमने
दूर से ही सही ,कोई हाल तो पूछे
बेगानियत के तो समुद्र पार किए है हमने
लफ्जों पर हमारे ,कभी तो मुस्कुराइए
अश्कों के तो कई वार सहे हैं हमने
Always seeking your blessings and wishes💕💕💕
बहुत ही गहराईं है इस कविता कीपंक्तियों में! सुंदर भाव उभर आए हैं। आपकी हिंदीभी बहुत अच्छी है।
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धन्यवाद sir
प्रयासरत है अभी लेखनी हमारी
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