
चांदनी रात से थोड़ी गुज़ारिश कर लूँ
मीठी नींद की थोड़ी सिफारिश कर लूँ
बस पलको की चादर ताने, मेरी आँखें
जो देखें ऐसे ख्वाबों की बारिश कर लूं
गुज़ारिश तो बहुत बार की हमने
रात चांदनी आयी सुनने
इंतज़ार किया इत्मिनान से हमने
ख्वाब भी लगी कई बुनने
ख्वाबों की दुनिया फूलों से भरी
जैसे फरिश्तों ओर परियो की नगरी
संगीत मधुर और रोशनी की छटा
मानो गहरे अंधकार को रही हो हटा
गुज़ारिश करने को फिर मन हो आतुर
ख्वाबों की दुनिया से न जाऊ कभी दूर
बस इतनी सी गुज़ारिश है
मीठी नींद की सिफारिश है।
Image : pinterest
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Bht achi rachna h 👌👏
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Thank you so much😊
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ख्वाबों की दुनिया भी अजीब है
जहां हर चीज अपने करीब है।
अच्छी सोच। अच्छी कविता। सब को अच्छी नींद नसीब हो।👌👌💐
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Vah vah kya bat sir 💐👌👌👌
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आदरणीय रीना जी 🙏🌹
नींद से पहले आत्मा की एक कोमल प्रार्थना जैसी है,
आपकी यह कविता !
जहाँ चाँदनी शब्दों को सहलाती है
और ख़्वाब पलकों पर
फूलों की तरह खिल उठते हैं।
आपने रात को केवल समय नहीं रहने दिया,
उसे एक संवेदनशील सखी बना दिया
जो गुज़ारिश सुनती है,
इंतज़ार निभाती है
और सपनों की दुनिया
धीरे-धीरे रच देती है।
पलकों की चादर,
ख़्वाबों की बारिश,
और मीठी नींद की सिफ़ारिश
इन पंक्तियों में
थकान नहीं, विश्वास है;
भागदौड़ नहीं, विश्रांति है।
आपकी कविता पढ़ते हुए
लगता है जैसे
अंधकार सचमुच पीछे हट रहा हो
और मन
संगीत व उजास के बीच
शांत हो रहा हो।
बस यही दुआ है
चाँदनी आपकी हर गुज़ारिश सुने,
नींद हर रात
आपके ख़्वाबों की रखवाली करे,
और आपकी लेखनी
इसी तरह
सुकून की बारिश बरसाती रहे।
-विजय श्रीवास्तव
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इतनी ख़ूबसूरती से आपने मेरी कविता को एक नया आयाम कविता के रूप में दिया है
बहुत बहुत धन्यवाद आपका 😊
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